Friday, 5 April 2019

दुनिया के आधे से ज्यादा बच्चों की जिंदगी केवल एक शब्द ने खराब कर दी है...वो है तुलना

The comparison is the Thief of Joy
                                                           - Theodore Roosevelt

हमारा सबसे बड़ा अपमान है हमारी तुलना किए जाना। वो भी किसी ऐसे व्यक्ति के साथ, जिसका हमारे चरित्र निर्माण में कोई योगदान नहीं है। और बच्चों का दुर्भाग्य देखिए कि उन्हें सबसे ज्यादा सहन करना पड़ता है तुलना को।

अगर गौर करें तो तुलना ही हमारा वो ब्रह्मास्त्र बन गया है जिसके सामने हम बच्चों को हमेशा हारा हुआ, निसहाय और पस्त पाते हैं।



तुलना, तीसरा सबसे बड़ा Pressure है जो Parents अपने बच्चों पर उपयोग करते हैं। पहले दो यानी - सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग और  क्या कमाएगा? नौकरी कैसे मिलेगी? जिंदगी भर क्या करेगा? के बारे में हमने पिछली पोस्ट में बात की।

जरा देखिए कि हमारी तुलना क्या, कैसी और कितनी निर्रथक होती है। हमारी तुलना में कोई Logic, Sense या Scientific Fact नहीं होता। होती है तो बस एक कोशिश। किसी तरह शर्माजी के लड़के, गुप्ताजी की लड़की या वर्माजी के भतीजे का उदाहरण देकर अपने बच्चों को कमतर बताने की कोशिश।

उसने तो 12वीं करते ही IIT की तैयारी कर ली थी। पूरे पूरे दिन घर में बंद रहकर पढ़ाई करता रहा। आज देखो। कितनी अच्छी नौकरी कर रहा है। पूरे 40 लाख का पैकेज है।

ऐसे ही कई जुमले हमारे बच्चे दिन रात, हजारों बार सुनते हैं। बार-बार। लगातार।

क्या फर्क है मोटिवेशन, उदाहरण, मिसाल और तुलना में-

इन चारों Expressions का कुछ यूं इस्तेमाल किया जा सकता है -

बेटा/बेटी। तुम्हारें अंदर ढेरों काबिलियत हैं। बस इनमें से उस एक को पहचानो जिसमें तुम Best हो। उसे इतने आगे ले जाओ कि वो तुम्हारा पैशन Passion बन सके। याद रखना Passion ही अगर Profession बने तो कामयाबी कभी दूर नहीं रहती। रही बात Motivation की, तो इसके लिए हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं।
बेटा/बेटी। एक फिल्म में हिरोइन रही मयूरी कांगो ने आज (5 April 19) Acting छोड़ने के 15 साल बाद Google India में एक हायर पोस्ट पर ज्वाइन किया है। यह इस बात का अच्छा उदाहरण है कि अगर आप अपनी पढ़ाई या Knowledge Gaining जारी रखते हैं तो आपकी Achievements कभी आपको निराश नहीं करती।
बेटा/बेटी। सचिन, गीता-बबीता, आलिया, रणबीर, दीपिका... सब अपने-अपने field की मिसालें हैं। अपना Talent पहचानो और उसे Professionally Deal करो। 
बेटा/बेटी। आखिर तुम करना क्या चाहते हो? जरा अपने आस-पास देखो। तुम्हारे कितने ही दोस्त नौकरी करके अच्छा खासा कमा रहे हैं। तुम हो कि कुछ Decide ही नहीं करते। जरा गुप्ताजी के लड़के को देखो...

बस यही सारा फर्क है। समझने और समझाने की बात है। एक ही Request...पहले समझिए फिर समझाइए।





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