Monday, 4 March 2019

Success और इससे जुड़ी और बहुत सारी बातें…

Success यानि क्या?

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में Basket Ball के महान कोच रहे जॉन वुडन के अनुसार -  “Success is peace of mind, which is a direct result of self-satisfaction in knowing you made the effort to do your best to become the best that you are capable of becoming.” 

यानि - कामयाबी दिमाग की शांति है, जो आत्मसंतोष से आती है। आत्म संतोष इस बात का कि आपने जो सर्वश्रेष्ठ आप बनना चाहते थे, वो बनने में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। 




यानि कुछ बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं कामयाब या Successful होने के लिए। पहली कि सक्सेस का कोई बाहरी पैमाना नहीं है। यह बहुत अंदरूनी चीज है। सिर्फ मैं अपनी पूरी Consciousness यानि एकाग्रता के साथ यह घोषित कर सकता हूं कि मैं कामयाब हूं या नहीं...

मतलब पेरेंटिंग के मामले में इसका सीधा सा मतलब है- आप जो अपने बच्चे को बनाना चाहते हैं, क्या अंदर से आपका बच्चा उसे सक्सेसफुल मानेगा या नहीं? मसलन आपकी नजर में देश का सबसे बड़ा डॉक्टर बनना आपके बच्चे की सफलता है, और वो चाहता है कि वो Music के फील्ड में अपना नाम कमाए। 

अब Efforts तो दोनों में होंगे। आपके उसे डॉक्टर बनाने में भी, और उसके अच्छा Musician बनने में भी। लेकिन डॉक्टर बनाने में आत्मसंतोष नहीं होगा। न आपको, न उसे।

अब जाहिर सा सवाल हो सकता है आपका- अरे भई! एक बच्चे को क्या पता कि क्या बनना उसके लिए सही है। बड़े होकर उसे क्या करना है, यह तो हम ही उसे बताएंगे न। 

बिल्कुल सही. लेकिन एक बात सोचिए। अगर एक बच्चे को नहीं पता कि उसे क्या बनना है तो यह भी तय है कि उसे आप बचपन में कुछ बना भी नहीं सकते। यानि मैंने नहीं सुना कोई 15 साल का डॉक्टर, इंजीनियर या सॉफ्टेवयर डेवलपर (तथागत तुलसी या कौटिल्य जैसे बच्चे अपवाद हैं। ) 

तो अगर उसे बड़ा होने के बाद ही कुछ बनना है तो उसे बड़ा होने तो दीजिए। तब तक आप एक अच्छे मां-बाप की तरह उसकी बेहतर से बेहतर परवरिश कीजिए। बिल्कुल निस्वार्थ, निष्फल भाव से। अगर आपकी परवरिश सही रही तो वो चाहे कुछ भी बने। हमेशा खुद भी खुश रहेगा, आपको भी खुश रखेगा। 

फिर हममें से ज्यादातर के लिए सफलता के मायने Materialism यानि भौतिकता में छिपी है। इसी बारे में बात अगली पोस्ट में... 

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