Sunday, 10 March 2019

Parenting के पहले सूत्र से शुरू करते हैं.... जो है- बच्चों के साथ समय बिताइए।

अच्छे मां-बाप होने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी और पहला सूत्र क्या हो सकता है? 

अरे भई यह तो बहुत व्यापक है। यानी हर बच्चे, हर मां-बाप के लिए अलग-अलग।

तो आपको कैसे पता चलेगा कि मेरे केस में Best Parenting के मायने क्या है?


बहुत आसान है। आपके बच्चों को आपसे बेहतर कौन समझ सकता है। तो उन्हें समझिए। उसके बाद ही तो पता चलेगा कि आपके पास क्या तरीका है Better या The Best पेरेंट होने का।


लेकिन बच्चों को समझें कैसे?

Parenting, Time Management. 

फिर बहुत आसान है। उनके साथ समय बिताइए। उन्हें वक्त दीजिए। ज्यादा से ज्यादा नहीं... बेहतर से बेस्ट टाइम। Quantity of Time नहीं Quality of Time.

अरे यही तो सबसे बड़ी समस्या है। टाइम कहां है बच्चों के लिए? भागदौड़ भरी जिंदगी। घर, ऑफिस, ट्रैफिक, स्ट्रेस आदि आदि। टाइम कैसे निकालें?
एक बच्चे के पिता के साथ संवाद की हजारों बार दोहराई जा चुकी कहानी। वही... पापा आप एक घंटे में कितना कमा लेते हो। प्लीज कल एक घंटा मेरे साथ बिताना। वगैरा-वगैरा....

कृपया इस तरह का इमोशनल अत्याचार मत कीजिए। ये कहानी दर्जनों बार पढ़ चुका हूं और मुझे नहीं लगता इसमें जरा सी सच्चाई है।
प्रिय दोस्तों... आपसे निवेदन है कि प्लीज टाइम की कमी को मत कोसिए। असल में कमीटाइम मैनेजमेंट की है। क्योंकि दुनिया के सबसे व्यस्त व्यक्ति से लेकर निपट ढाले बैठे किसी आदमी तक सबको दिन में 24 घंटे ही मिले हैं। समस्या यह है कि आप इन घंटों का मैनेजमैंट कैसे करते हैं।
सच कहूं अगर आपकी संतान भी इस कहानी के बच्चे की तरह आपसे आपका एक घंटा खरीदने निकली है तो धिक्कार है।


सुबह-सुबह उठकर केवल 15 मिनट बच्चों को लेकर अपने घर के निकटतम पार्क में चले जाइए। आपका और बच्चों का दिन बेहतरीन हो जाएगा। बच्चे कभी भी समय की मात्रा पर ध्यान नहीं देते।

प्रयोग करके देखिए... केवल तीस सेकंड में नींद से जागा बच्चा तुरंत खेलने के लिए तैयार हो जाएगा और अगले तीस सेकंड में वो आपके साथ खेलने भी लगेगा। अगर बच्चे बड़े हैं तो उन्हें बस आपका ध्यान चाहिए।

खाने के समय, तैयार होते समय या किसी भी समय बस उससे बात भर कर लीजिए। रोज ... लगातार ऐसा कीजिए। वो कभी आपके बिजी होने की शिकायत नहीं करेगा।
डॉ. विजय अग्रवाल जो 12 वर्षों तक राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा के निजी सचिव रहे औरटाइम मैनेजमैंट पर जिनका गहरा अध्ययन है, सौभाग्य से भास्कर पत्रकारिता अकादमी में मेरे बैच के मैंटर थे। उनके दो व्याख्यानों ने टाइम मैनेजमैंट के बारे में बहुत कुछ सिखाया जो यादगार है।

परिवार और बच्चों के संदर्भ में टाइम मैनेजमेंट के बारे में... अगली पोस्ट में

2 comments:

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