Sunday, 31 March 2019

नोट्स बनाते-बनाते थक चुके बच्चों के हाथ अब सुसाइड नोट बनाने लगे हैं... जरा संभल जाइए

भारत में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या Sucide कर रहा है। और Sucide Attempt यानी आत्महत्या के प्रयास करने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। 15 से 29 की उम्र में आत्महत्या करने वालों के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में आता है। आंकड़े National Crime Record Bureau (NCRB) के 2015 के सर्वे के हैं। 

और भी चौंकाने वाले आंकड़ों के लिए यहां क्लिक करें।

दोस्तों, जोधपुर की यह खबर आपके सामने है। महज 7वीं क्लास में पढ़ने वाला छात्र आत्महत्या के बारे में सोच रहा है। एक बेटी अपने पिता को सुसाइड नोट में लिख रही है - पापा, आपने मम्मी से शादी ही क्यों की? मम्मी जानना भी नहीं चाहती कि मैं क्या करना चाहती हूं। वो तो बस मुझे डॉक्टर बनाना चाहती है। चाहे मैं बनना चाहूं या नहीं।


जरा गौर कीजिए। कहीं यही वह प्रेशर तो नहीं, जो नोट्स बनाते-बनाते बच्चों को सुसाइड नोट बनाने पर मजबूर कर देता है। मां-बाप होने के नाते आपको बच्चों से ज्यादा प्यार उनकी परफार्मेंस Performance से कैसे हो सकता है।

ये हैं वे कारण जिनके रहते हम बच्चों पर बेस्ट से बेस्ट Performance का दबाव बनाते हैं-

मनोवैज्ञानिक और समाज शास्त्रियों ने इस बारे में बहुत सी रिसर्च की हैं। वे जानने में लगे हैं कि आखिर मां-बाप अपने बच्चों पर उसकी पसंद-नापसंद जाने बिना पढ़ने या Carrer चुनने का दबाव क्यों बनाते हैं? रिसर्च के नतीजे बहुत सरल भाषा में आपसे शेयर कर रहा हूं-

1. सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग: 
ये आपने कई बार सुना होगा। लेकिन ये है सौ फीसदी सच। Researchers की मानें तो बच्चों को लेकर मां-बाप के 10 से 8 फैसले पूरी तरह लोग क्या कहेंगे के जुमले पर आधारित होते हैं।
  • 10वीं में अच्छे नंबर नहीं आए तो Arts लेनी पड़ेगी। लोग क्या कहेंगे?
  • Music Teacher, Drawing Teacher या Sports Teacher बन गया तो लोग क्या कहेंगे?
  • खुद तो अच्छे नंबर ला नहीं पाया। हम भी अगर Motivate न करें तो लोग क्या कहेंगे?
ये वो सबसे Popular जुमले हैं जो किशोर बच्चों के साथ मां-बाप के Discussion में अक्सर सुनने में आते हैं।

कोई मुझे बताए अगर बच्चा लेना ही Arts चाहता है तो 10वीं के नंबर इसमें क्या करेंगे? कोई बच्चा Music, Sports या Drawing Teacher में ही अपना हीरो देखता है तो आपको क्या परेशानी है? अगर बच्चा अच्छे नंबर नहीं ला सकता या नहीं ला रहा तो आप Motivate करके क्या कर लेंगे? आज नहीं तो कल, उसे अपनी जिंदगी खुद ही तय करनी है। आप कहां तक उसे अंगुली पकड़कर चलाते रहेंगे?

2. क्या कमाएगा? नौकरी कैसे मिलेगी? जिंदगी भर क्या करेगा?
मां-बाप की सबसे बड़ी चिंता। बच्चा सैटल कैसे होगा? क्या कमाएगा? नौकरी कैसे मिलेगी?
जरा सोचिए। क्या यह सच में आपकी जिम्मेदारी है? क्या आपने संतान पैदा की है या स्लीपवेल का गद्दा बनाया है जिसकी 25 साल की गारंटी आपको पूरी दुनिया को देनी है। 

उसके आज का सत्यानाश करके आप उसके कल को बेहतर बनाने पर तुले है। क्या आप स्टांप पेपर पर लिखकर दे सकते हैं कि अगर वो आपकी Planning के हिसाब से चला तो जिंदगी भर अच्छा ही करता रहेगा? इस हिसाब से तो दुनिया के किसी भी कथित कामयाब मां-बाप के बच्चे को नाकामयाब होना ही नहीं चाहिए था।

लेकिन हमारे सामने तो हजारों-हजार ऐसे उदाहरण हैं जिनमें बड़े-बड़े Businessmen, Political Leaders, Bureaurocrates के बच्चे अपनी Legacy कायम नहीं रख पाए।

असल में हमारा ध्यान इस बात पर बिल्कुल नहीं है कि आखिर एक मां-बाप होने के नाते हमें क्या करना है। हम में से ज्यादातर तो रस्म अदायगी के नाम पर बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। हमें वास्तव में क्या करना चाहिए, इसके बारे में जल्द ही बात होगी।

3. दुनिया के आधे से ज्यादा बच्चों की जिंदगी केवल एक शब्द ने खराब कर दी है। वो है तुलना। 
क्योंकि ये बहुत बड़ा और व्यापक असर वाला विषय है, इसकी बात अगली पोस्ट में।

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