Thursday, 21 March 2019

क्या अक्षय कुमार, फराह खान या ऐश्वर्या राय ही पेरेंटिंग पर बात कर सकते हैं? आप या मैं नहीं?

हमारे यहां कही गई बात से ज्यादा कहने वाले चेहरे की कद्र होती है। बात तब बड़ी हो जाती है जब उसे कहने वाला भी बड़ा हो। इसके उलट अगर कोई साधारण आदमी कितनी भी बड़ी बात कहे, वह साधारण ही रहती है।



दोस्तों Parenting पर बात करते करते एक सवाल सामने आया। किसने पूछा, जरूरी नहीं। जरूरी है सवाल- कि आप किस हैसियत से पेरेंटिंग पर लिखते हैं? क्या आप कोई Doctor, Physologist, Celebrity, Socialist या Researcher हैं?

जी नहीं. मैं इनमें से कोई नहीं हूं। लेकिन मैं दो बच्चों का पिता हूं। बड़ी बेटी जो 10th में है बेटा 6th में। बेटी ने कई साल पहले जब पहली बार पूछा कि पापा आप आपकी उम्र कितनी है? तो मेरा जवाब था- बेटी तुम्हारे पापा कि उम्र ठीक तुम जितनी ही है। वो खिलखिलाकर हंस पड़ी। बोली बताओ न पापा... मैंने फिर कहा- हां बेटा... मेरी उम्र ठीक तुम्हारे बराबर है।

वो बोली- कैसे? मैंने कहा- मैं पापा ठीक उसी पल बना था जब तुम पैदा हुई थी। उससे पहले मैं सिर्फ एक शादीशुदा नौजवान था। जैसे ही तुम मेरी गोद में आई... मैं पापा बन गया। हो गई न तुम्हारी और तुम्हारे पापा की उम्र बराबर।

इस लिहाज से मेरा Parenting Experience भी कुल जमा 16 साल का ही है। हां, 10 की उम्र में मैं मामा बन गया था और तीन भांजों को आंख खोलने से आज युवा होते देखने का बहुत ही खूबसूरत अनुभव भी मेरी कीमती जमा पूंजी है।

अब मूल बात Main Topic पर लौटते हैं। क्या सिर्फ Celebrities, Researchers, या So-Called Successful लोग ही Parenting पर बात कर सकते हैं? हम या आप नहीं? मेरे ख्याल से ऐसा बिल्कुल नहीं है।

मैं ऐसे बहुत से माता-पिता को Personally जानता हूं जो मां-बाप होने की सारी कही-अनकही शर्तें बखूबी पूरी करते हैं। वे अपने बच्चों के फेवरेट हैं, उनके बच्चे भी Numbers की Rat Race या Success की गढ़ी-गढ़ाई परिभाषाओं के साथ-साथ अच्छी संतान होने के सारे फर्ज पूरे करते हैं। क्यों ऐसे Parents को हम कामयाब  मानकर उनकी सलाह या अनुभव नहीं ले सकते।

जरा गौर फरमाइए- 

एक मां जिसने ठान ली कि शिशुओं को एलोपेथी की दवाएं नहीं देगी। इस मां ने अपने बच्चों की छुटपुट बीमारियों के इलाज के लिए पहले होम्योपैथी की स्टडी की और फिर खुद दवा बनाकर अपने बच्चों को दी।

एक पिता जिसने Night Shift करते हुए भी अपने बच्चे की Race की तैयारी के लिए ऐसा Time Table बनाया जिसमें उसे खुद सोने के लिए 3 या 4 घंटे ही मिल पाते। लेकिन बेटा Race जीता। 

माता-पिता जिन्होंने बेटी के CBSE Board के दसवीं की परीक्षा के लिए अपना पूरा फोकस इस बात पर किया कि कैसे वे बिना कोई Pressure बनाए अपनी बेटी को अच्छे Marks लाने में मदद करेंगे। हंसते-खेलते पढ़ने और जितना टाइम बेटी पढ़ेगी, उसके आधे टाइम तक उसे खेलने देने के नायाब Formulas भी इस दंपत्ति ने इजाद किए। 

ये सभी लोग एक मुकम्मल परिचय के साथ मेरे आस-पास मौजूद हैं। मैं यहां नाम या पहचान इसलिए नहीं बता रहा क्योंकि नाम लेने से हम इमेजेज बनाने लगते हैं और पूरी बात एक अलग दिशा में चली जाती है।

मेरी नजर में ये सारे मां-बाप पूरी तरह से किसी Celebrity की तरह सुने और पढ़े जाने के हकदार हैं। इन्होंने बच्चों को अपनी एक अलग सोच के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है। और मेरी नजर में सबसे बड़ी बात कि इनकी अपने बच्चों के साथ Bonding बहुत गजब की है।

यह पाठकों पर निर्भर करता है कि इन्हें कामयाबी का तमगा दिया जाएगा या नहीं? क्योंकि मेरी नजर में Success या कामयाबी के अलग मायने हैं। लेकिन एक गुजारिश जरूर है, अगर कोई कुछ अच्छा करता है, तो उसे बिना किसी Tag या नाम के स्वीकार किया जाना चाहिए। चाहे वे Parenting पर बात करते साधारण लोग हों या Celebrities, अच्छी बात सबकी स्वीकार्य होनी चाहिए।

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