Tuesday, 12 March 2019

हर उम्र के बच्चों के साथ समय बिताने का अलग होता है तरीका... बस समझिए और अपनाइए...

पिछली पोस्ट में बात निकली थी कि बच्चों को समझने के लिए उनके साथ समय बिताना पहली और अनिवार्य शर्त है।

परिवार के संबंध में समय प्रबंधन Time Management के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

इसी शर्त को थोड़ा और Easy बनाते हैं।

परिवार के लिए समय निकालना शायद बहुत ही आसान है। क्योंकि यहां ना तो कोई 10 से 5 की हाजिरी लगनी है, ना कोई अन्य डेडलाइन है। परिवार में क्योंकि कोई औपचारिकता Formality नहीं होती, इसलिए आप जब चाहें घुलमिल सकते हैं। असल में आपका परिवार के साथ बिताया एक-एक लम्हा आपको रिचार्ज करता है। 

जरा इस ग्राफिक पर गौर कीजिए-

Age & Treatment with Kids.
दिन का कोई न कोई ऐसा समय जरूर होता है जब पूरा परिवार अमूमन घर पर हो। सुबह की चाय, नाश्ता, लंच या डिनर। बस कोशिश कीजिए की उस समय आप सब के साथ हों। सबसे बात कीजिए। याद रखिए महत्वपूर्ण ये नहीं है कि आपने कितना समय परिवार के साथ बिताया। महत्वपूर्ण है कि वो समय आपने कैसे बिताया।

आपकी अपने परिवार से संवाद में आ रही कमी खत्म करने में फोन भी बहुत कारगर हो सकता है। खाली समय में पत्नी को फोन करके बताइए कि आज वो पिंक साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थी। या बेटा या बेटी से बात करते हुए उन्हें कहिए कि आप उन्हें ऑफिस में भी याद करते रहते हैं। उन्हें भी अच्छा लगेगा और संवादहीनता की स्थिति भी नहीं रहेगी।

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अपने बच्चों के साथ समय न बिताना चाहे। बस उन्हें समझना का अपना नजरिया बदलिए। 

दो से आठ वर्ष के बच्चे

इनके लिए आपकी उपस्थिति फीजिकल होनी बहुत जरूरी है। इस उम्र में पास होने का मतलब ही खेलना, मस्ती करना, साथ में उठापटक करना होता है। यहां न संवाद जरूरी है, ना गंभीरता। और हां। एक और खासियत। बच्चों को समय की मात्रा से कोई मतलब होता ही नहीं। उन्हें तो बस चाहिए आपका साथ।

एक छोटा सा प्रयोग करके देखिए- एक नियम बना लीजिए की स्कूल से लौटते ही अपने बेटे या बेटी को पूरे प्यार और दुलार के साथ हग Hug करेंगे। कुछ ऐसे की उसे लगे कि मेरी मम्मी या पापा तो घंटों से मेरा ही इंतजार कर रहे थे। यकीन मानिए... यह छोटा सा प्रयोग उसे आपके इतने करीब लाएगा कि सोच भी नहीं सकते। और अगर इसे आप अपनी आदत बना लें, तो ताउम्र ये बच्चे आपसे दूर नहीं होंगे। 

इसके बाद उसके पूरे स्कूल टाइम के बारे में पूछिए। बहुत ही फनी तरीके से। यानी कुछ ऐसे - अरे.... आज तो आपके कान बिल्कुल लाल हैं। लगता है पनिशमेंट मिली है। 

या मेरा बच्चा बहुत थका सा लग रहा है। लगता है आज खूब पढ़ाई की। 
या ओके... फर्स्ट पीरियड से स्टार्ट करते हैं... बताओ क्या क्या हुआ आज स्कूल में?

इस तरह बच्चा न सिर्फ आपको अपने करीब पाएगा, बल्कि ये बताते-बताते वो अपने दोस्तों, टीचर्स, स्कूल के माहौल आदि सबके बारे में बात करेगा। यानी आप हंसते खेलते यह जान भी पाएंगे कि बच्चा स्कूल में क्या कर रहा है और उसके साथ समय भी बिता पाएंगे। 

और मजे की बात यह है कि ये सारी बात आप अपने बच्चे से फोन पर भी कर सकते हैं। केवल 5 या 7 मिनट में। उसके लिए इतना काफी है। 

आठ साल से बड़े बच्चों के साथ कैसे बिताएं समय? अगली पोस्ट में

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