Sunday, 3 March 2019

Being Parent... कितना मुश्किल या आसान है मां-बाप होना

Parenting... यानि परवरिश। 

वह दौर जो तय करता है कि आपने जिन बच्चों को सहेज-संभालकर कर बड़ा किया, वो कितने कामयाब Successful हुए। क्या वे पूरी तरह से वो बन पाए जो आप उन्हें बनाना चाहते थे? कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई? 

शायद यही है पैरेंटिंग यानि परवरिश की बरसों पुरानी परिभाषा। बच्चे, जिम्मेदारी, संस्कार, परवरिश, संभालना, सहेजना, उनके बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े होने तक की चिंता Bla Bla Bla...

दोस्तों... क्या दुनिया बहुत बदल नहीं गई है? क्या आज भी हमारे सामने Parenting को लेकर वही सदियों पुराने सवाल हैं ? या वक्त ने उन सवालों, उन परिभाषाओं को कुछ सरल किया है?



I Mean सबसे पहले तो यही बात कि Success यानि क्या? आपके लिए और बच्चे के लिए इसके मायने क्या? डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन जाए, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बन जाए या Businessman का बेटा Businessman बन जाए तो हो गया? हो गए आप सक्सेसफुल पेरेंटस?

ठहरिए सर. अभी बेटियों की तो बात ही नहीं हुई। सालों से उनके लिए तो एक ही बात Success का Parameter मानी जाती रही है, पढ़ लिखकर, शादी करके सेटल हो जाए... बस। कई जगह तो बेटियों की Parenting का पूरा थीम ही उनकी शादी होती है। जैसी बेटियां पैदा ही शादी करने के लिए हुई हों।

Main Topic पर आते हैं। गुगल,  Physiologists या मनोवैज्ञानिकों या डॉक्टरों से हमारा सवाल कि क्या हम अच्छे पेरेंटस हैं? कहीं न कहीं यही बताता है कि परवरिश को लेकर बहुत ज्यादा conscious हैं।  क्या हम बच्चे को सही तरह से पाल रहे हैं? वो आगे चलकर क्या बनेगा, क्या हमने इसकी बहुत अच्छे से तैयारी कर ली है?

अगर बार-बार आप अपने आप से ये सवाल पूछते हैं तो संभल जाइए। आप सचमुच अपने और अपने बच्चे के लिए मुश्किलों को न्यौता दे रहे हैं। क्योंकि मेरा मानना है कि आजकल मां-बाप नहीं, बच्चे यह चुनाव करते हैं कि उन्हें क्या बनना है। वे आपके पास अपने Options लेकर आते हैं और उन्हें बस आपकी रजामंदी और Support चाहिए। इसके बाद अगर बच्चों की जुबान में ही कहें तो take a chill pill Bro...

मेरा मानना है बेस्ट पेरेंटस होने की बड़ी बड़ी परिभाषाओं, Formulas, Parameters से ज्यादा एक छोटी सी बात पर ध्यान दिया जाए। एक छोटा सा टेस्ट... बहुत साधारण सा... जो आप कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।

क्या... आपके बच्चों को उस वक्त अपने पास बुलाइए जब वो अपना सबसे Favorite काम कर रहा हो। मसलन टीवी देखते वक्त, अपना पसंदीदा Game या Sports खेलते वक्त या अपने दोस्त की  Birthday Party के बीच से। यकीन मानिए... अगर आपका बेटा या बेटी अपने फेवरेट काम को बीच में छोड़कर आपके पास आ सकता है, वो तुरंत रिस्पांस करता है, तो आप सौ टका सही पेरेंट हैं।

इसके पीछे कोई गूढ़ विज्ञान नहीं ब्लकि बहुत सरल सा लगाव है जो आपके बच्चों में आपके लिए मौजूद है। और यकीन मानिए, अगर बचपन से किशोरावस्था की दहलीज पर पांव रख चुके बच्चों में अगर आपके प्रति यह लगाव मौजूद है तो आप सही पेरेंट्स हैं।

Success और इससे जुड़ी और कई सारी बातें... अगली पोस्ट में...

1 comment:

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